Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.88.d3: धर्मनिष्ठ युधिष्ठिर शत्रुता का नाश करेंगे; क्योंकि यदि स्वजनों से कोई भूल हो जाए, तो वह अक्षम्य अपराध नहीं माना जाता।' श्रीकृष्ण भी नहीं चाहते कि स्वजनों में झगड़ा हो, वे स्वजनों से सदैव संतुष्ट रहते हैं। | mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैरं नेष्यति धर्मात्मा स्वजने नास्त्यतिक्रम:।
न विग्रहमति: कृष्ण: स्वजने प्रतिनन्दति॥
अनुवाद
धर्मनिष्ठ युधिष्ठिर शत्रुता का नाश करेंगे; क्योंकि यदि स्वजनों से कोई भूल हो जाए, तो वह अक्षम्य अपराध नहीं माना जाता।' श्रीकृष्ण भी नहीं चाहते कि स्वजनों में झगड़ा हो, वे स्वजनों से सदैव संतुष्ट रहते हैं।
‘Dharma-spirited Yudhishthira will end enmity; because if a mistake is committed by the relatives, it is not considered an unpardonable crime. Shri Krishna also does not want that there should be a quarrel among the relatives, he is always satisfied with the relatives.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥