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mahabharat 8.88.d1: ‘अपने वृद्ध पिता धृतराष्ट्र और यशस्वी माता गांधारी को देखते हुए दयालु धर्मराज युधिष्ठिर मेरे अनुरोध पर भी संधि कर लेंगे।   |   mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  8.88.d1 
(वृद्धं पितरमालोक्य गान्धारीं च यशस्विनीम्।
कृपालुर्धर्मराजो हि याचित: शममेष्यति॥
 
 
अनुवाद
‘अपने वृद्ध पिता धृतराष्ट्र और यशस्वी माता गांधारी को देखते हुए दयालु धर्मराज युधिष्ठिर मेरे अनुरोध पर भी संधि कर लेंगे।
 
‘Looking at his old father Dhritarashtra and glorious mother Gandhari, the kind Dharmaraja Yudhishthira will enter into a treaty even on my request.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)