Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.88.8-9h: युद्ध से मुंह मोड़कर भागना नहीं चाहिए' इस नियम से प्रेरित होकर आपके तथा शत्रु के सैनिकों ने उन दोनों महारथियों को चारों ओर से घेर लिया और युद्ध में उसी प्रकार डटे रहे, जैसे पूर्वकाल में देवताओं और दानवों ने इंद्र और शम्बरासुर को घेर लिया था।   |   mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  8.88.8-9h 
न चाभिसर्तव्यमिति प्रचोदिता:
परे त्वदीयाश्च तथावतस्थिरे॥ ८॥
महारथौ तौ परिवार्य सर्वत:
सुरासुरा: शम्बरवासवाविव।
 
 
अनुवाद
युद्ध से मुंह मोड़कर भागना नहीं चाहिए' इस नियम से प्रेरित होकर आपके तथा शत्रु के सैनिकों ने उन दोनों महारथियों को चारों ओर से घेर लिया और युद्ध में उसी प्रकार डटे रहे, जैसे पूर्वकाल में देवताओं और दानवों ने इंद्र और शम्बरासुर को घेर लिया था।
 
Inspired by the rule that 'no one should turn away from a battle and flee', your and the enemy's soldiers surrounded those two great warriors from all sides and stood firm in the battle in the same way as in the past the gods and demons had surrounded Indra and Shambarasur.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)