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mahabharat 8.88.34: अश्वत्थामा से ऐसा कहकर और बार-बार समझाकर उसे प्रसन्न करके आपके पुत्र ने अपने सैनिकों को आज्ञा दी कि, "अरे! तुम लोग हाथ में बाण लेकर चुपचाप क्यों बैठे हो? मेरे शत्रुओं पर आक्रमण करो और उन्हें मार डालो।"॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  8.88.34 
तमेवमुक्त्वाप्यनुनीय चासकृत्
तवात्मज: स्वाननुशास्ति सैनिकान्।
विनिघ्नताभिद्रवताहितान् मम
सबाणहस्ता: किमु जोषमासत॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा से ऐसा कहकर और बार-बार समझाकर उसे प्रसन्न करके आपके पुत्र ने अपने सैनिकों को आज्ञा दी कि, "अरे! तुम लोग हाथ में बाण लेकर चुपचाप क्यों बैठे हो? मेरे शत्रुओं पर आक्रमण करो और उन्हें मार डालो।"॥ 34॥
 
Having said this to Ashvatthama and having pleased him by repeated persuasion, your son ordered his soldiers saying, "Hey! Why are you sitting quietly with arrows in your hands? Attack my enemies and kill them."॥ 34॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि अश्वत्थामवाक्येऽष्टाशीतितमोऽध्याय:॥ ८८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें अश्वत्थामाका वचनविषयक अठासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १२ श्लोक मिलाकर कुल ४६ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)