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mahabharat 8.88.16-17h: तत्पश्चात् सैकड़ों रथी और हाथीसवार अर्जुन को मार डालने के लिए अत्याचारियों की भाँति वहाँ दौड़े। उनके साथ शक, तुषार, यवन और कम्बोज देश के श्रेष्ठ घुड़सवार भी थे॥16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  8.88.16-17h 
अथाभ्यधावंस्त्वरिता: शतं रथा:
शतं गजाश्चार्जुनमाततायिन:॥ १६॥
शकास्तुषारा यवनाश्च सादिन:
सहैव काम्बोजवरैर्जिघांसव:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सैकड़ों रथी और हाथीसवार अर्जुन को मार डालने के लिए अत्याचारियों की भाँति वहाँ दौड़े। उनके साथ शक, तुषार, यवन और कम्बोज देश के श्रेष्ठ घुड़सवार भी थे॥16 1/2॥
 
Thereafter, hundreds of charioteers and elephant-riders rushed there like tyrants with the intention of killing Arjun. Along with them were also excellent horsemen from the Shakas, Tusharas, Yavanas and Kamboja countries.॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)