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mahabharat 8.88.11-12h: दोनों ही अजेय और शत्रुओं का नाश करने वाले थे। दोनों ही अस्त्र-शस्त्रों में निपुण थे और एक-दूसरे को मार डालना चाहते थे। कर्ण और अर्जुन दोनों ही उस महासमर में वीर इन्द्र और जम्भासुर के समान निर्भय होकर विचरण कर रहे थे। 11 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 88: अर्जुनद्वारा कौरव-सेनाका संहार, अश्वत्थामाका दुर्योधनसे संधिके लिये प्रस्ताव और दुर्योधनद्वारा उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  8.88.11-12h 
उभावजेयावहितान्तकावुभा-
वुभौ जिघांसू कृतिनौ परस्परम्॥ ११॥
महाहवे वीतभयौ समीयतु-
र्महेन्द्रजम्भाविव कर्णपाण्डवौ।
 
 
अनुवाद
दोनों ही अजेय और शत्रुओं का नाश करने वाले थे। दोनों ही अस्त्र-शस्त्रों में निपुण थे और एक-दूसरे को मार डालना चाहते थे। कर्ण और अर्जुन दोनों ही उस महासमर में वीर इन्द्र और जम्भासुर के समान निर्भय होकर विचरण कर रहे थे। 11 1/2॥
 
Both were invincible and destroyers of enemies. Both of them were experts in weapons and wanted to kill each other. Both Karna and Arjun roamed fearlessly in that great battle like brave Indra and Jambhasura. 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)