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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक d7-d8
 
 
श्लोक  8.87.d7-d8 
ओजस्तेजश्च सिद्धिश्च प्रहर्ष: सत्यविक्रमौ॥
मनस्तुष्टिर्जयश्चापि तथाऽऽनन्दो नृपोत्तम।
ईदृशानि नरव्याघ्र तस्मिन् संग्रामसागरे॥
निमित्तानि च शुभ्राणि विविशुर्जिष्णुमाहवे।
 
 
अनुवाद
हे व्याघ्र! श्रेष्ठ! ओज, तेज, सिद्धि, हर्ष, सत्य, पराक्रम, मानसिक संतोष, विजय और हर्ष - ऐसे भाव और शुभ कारण उस रणसागर में विजयी अर्जुन में प्रविष्ट हो गये थे।
 
Tiger! The best! Vigor, brightness, accomplishment, joy, truth, bravery, mental contentment, victory and joy - such feelings and auspicious reasons had entered into the victorious Arjuna in that ocean of battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)