Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.87.d5-d6: विनाश में प्रवृत्त प्राणियों के सामने जो बुराइयाँ प्रकट होती हैं, मृत्यु के समय विपरीत भावनाओं का आश्रय लेने वाले मनुष्य में जो भावनाएँ प्रवेश करती हैं, वे सभी भावनाएँ और बुराइयाँ एक साथ सूतपुत्र कर्ण के भीतर प्रविष्ट हो गईं। | mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विपरीतान्यरिष्टानि भवन्ति विनशिष्यताम्॥
ये त्वन्तकाले पुरुषं विपरीतमुपाश्रितम्।
प्रविशन्ति नरं क्षिप्रं मृत्युकालेऽभ्युपागते॥
ते भावा: सहिता: कर्णं प्रविष्टा: सूतनन्दनम्।
अनुवाद
विनाश में प्रवृत्त प्राणियों के सामने जो बुराइयाँ प्रकट होती हैं, मृत्यु के समय विपरीत भावनाओं का आश्रय लेने वाले मनुष्य में जो भावनाएँ प्रवेश करती हैं, वे सभी भावनाएँ और बुराइयाँ एक साथ सूतपुत्र कर्ण के भीतर प्रविष्ट हो गईं।
The evils that appear in front of the creatures prone to destruction, the feelings that enter the man who takes shelter of the opposite feelings at the time of his death, all those feelings and evils simultaneously entered inside Karna, the son of Suta.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥