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mahabharat 8.87.99: एक-दूसरे के घोड़ों को देखकर घोड़े हिनहिनाने लगे और एक-दूसरे को डाँटने लगे। उसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने शल्य की ओर ऐसे देखा मानो वे नेत्ररूपी बाणों से उसे बींध रहे हों॥99॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  8.87.99 
हया हयानभ्यहेषन् स्पर्धमाना: परस्परम्।
अविध्यत् पुण्डरीकाक्ष: शल्यं नयनसायकै:॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
एक-दूसरे के घोड़ों को देखकर घोड़े हिनहिनाने लगे और एक-दूसरे को डाँटने लगे। उसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने शल्य की ओर ऐसे देखा मानो वे नेत्ररूपी बाणों से उसे बींध रहे हों॥99॥
 
Seeing each other's horses, the horses started neighing and scolding each other. At the same time, Lord Krishna looked at the surgeon with a frown as if he was piercing him with arrows in the form of eyes. 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)