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mahabharat 8.87.98: दोनोंमें घोर द्वन्द्वयुद्धका अवसर आया, अतः दोनोंके ध्वजवाहकोंने पहले युद्ध आरम्भ किया ॥98॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  8.87.98 
तयोर्घोरतरे युद्धे द्वैरथे द्यूत आहिते।
प्रकुर्वाते ध्वजौ युद्धं पूर्वं पूर्वतरं तदा॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
दोनोंमें घोर द्वन्द्वयुद्धका अवसर आया, अतः दोनोंके ध्वजवाहकोंने पहले युद्ध आरम्भ किया ॥98॥
 
There was an opportunity of a fierce duel between the two, so the flag-bearers of both of them started the battle first.॥ 98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)