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mahabharat 8.87.92: उनके रथों पर स्वच्छ ध्वजाएँ ऐसी शोभा पा रही थीं मानो संसार के प्रलयकाल में राहु-केतु ग्रह आकाश में प्रकट हो गए हों ॥92॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  8.87.92 
तयोर्ध्वजौ वीतमलौ शुशुभाते रथे स्थितौ।
राहुकेतू यथाऽऽकाशे उदितौ जगत: क्षये॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
उनके रथों पर स्वच्छ ध्वजाएँ ऐसी शोभा पा रही थीं मानो संसार के प्रलयकाल में राहु-केतु ग्रह आकाश में प्रकट हो गए हों ॥92॥
 
Clean flags adorned their chariots as if the planets Rahu and Ketu had appeared in the sky at the time of the world's doomsday. ॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)