श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  8.87.91 
तद् भीरुसंत्रासकरं युद्धं समभवत्तदा।
अन्योन्यस्पर्धिनोरुग्रं शक्रशम्बरयोरिव॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
उस समय इन्द्र और शम्बरासुर के समान एक-दूसरे से ईर्ष्या रखने वाले उन दोनों वीरों में भयंकर युद्ध होने लगा, जिससे कायरों के हृदय में भय उत्पन्न हो गया।
 
At that time a fierce battle began between those two heroes who were jealous of each other like Indra and Shambarasur, which instilled fear in the hearts of cowards.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)