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mahabharat 8.87.88: देवता, दानव और गन्धर्व सभी पुरुषसिंह कर्ण और अर्जुन का अद्वितीय द्वन्द्वयुद्ध देखने की इच्छा से वहाँ खड़े थे॥88॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  8.87.88 
दिदृक्षवश्चाप्रतिमं द्वैरथं नरसिंहयो:।
देवदानवगन्धर्वा: सर्व एवावतस्थिरे॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
देवता, दानव और गन्धर्व सभी पुरुषसिंह कर्ण और अर्जुन का अद्वितीय द्वन्द्वयुद्ध देखने की इच्छा से वहाँ खड़े थे॥88॥
 
The gods, demons and Gandharvas all stood there with the desire to see the unique duel between Purushasingh Karna and Arjuna. 88॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)