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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 86-87
 
 
श्लोक  8.87.86-87 
इति श्रुत्वेन्द्रवचनं सर्वभूतानि मारिष।
विस्मितान्यभवन् राजन् पूजयांचक्रिरे तदा॥ ८६॥
व्यसृजंश्च सुगन्धीनि पुष्पवर्षाणि हर्षिता:।
नानारूपाणि विबुधा देवतूर्याण्यवादयन्॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इन्द्र के ये वचन सुनकर समस्त प्राणी आश्चर्यचकित हो गए और हर्ष से भरकर श्रीकृष्ण और अर्जुन की स्तुति करने लगे। उन्होंने उन दोनों पर दिव्य सुगन्धित पुष्पों की वर्षा भी की। देवताओं ने नाना प्रकार के दिव्य वाद्य बजाने आरम्भ किए।
 
Honorable King! Hearing these words of Indra, all the living beings were astonished and filled with joy they started praising Shri Krishna and Arjuna. He also showered divine fragrant flowers on both of them. The gods started playing various types of divine instruments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)