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mahabharat 8.87.82: वीर और पराक्रमी कर्ण भले ही श्रेष्ठ लोकों को प्राप्त कर ले; किन्तु विजय अवश्य ही श्रीकृष्ण और अर्जुन की होगी। 82.   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  8.87.82 
कर्णो लोकानयं मुख्यानाप्नोतु पुरुषर्षभ:।
कर्णो वैकर्तन: शूरो विजयस्त्वस्तु कृष्णयो:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
वीर और पराक्रमी कर्ण भले ही श्रेष्ठ लोकों को प्राप्त कर ले; किन्तु विजय अवश्य ही श्रीकृष्ण और अर्जुन की होगी। 82.
 
The valiant and valiant Karna may attain the best of the worlds; but victory must surely be of Sri Krishna and Arjuna. 82.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)