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mahabharat 8.87.80-81: देवलोक में अथवा मनुष्यलोक में इन दोनों की बराबरी करने वाला कोई नहीं है । देवताओं, ऋषियों और साधूओं के साथ-साथ तीनों लोक, समस्त देवता और समस्त भूत भी उनके अधीन हैं । उनके प्रभाव से ही सम्पूर्ण जगत् अपने-अपने कार्यों में तत्पर रहता है । 80-81॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 80-81
 
 
श्लोक  8.87.80-81 
नैतयोस्तु सम: कश्चिद् दिवि वा मानुषेषु वा।
अनुगम्यास्त्रयो लोका: सह देवर्षिचारणै:॥ ८०॥
सर्वदेवगणाश्चापि सर्वभूतानि यानि च।
अनयोस्तु प्रभावेण वर्तते निखिलं जगत्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
देवलोक में अथवा मनुष्यलोक में इन दोनों की बराबरी करने वाला कोई नहीं है । देवताओं, ऋषियों और साधूओं के साथ-साथ तीनों लोक, समस्त देवता और समस्त भूत भी उनके अधीन हैं । उनके प्रभाव से ही सम्पूर्ण जगत् अपने-अपने कार्यों में तत्पर रहता है । 80-81॥
 
There is no one in the world of gods or in the human world who can equal these two. Along with the gods, sages and bards, the three worlds, all the gods and all the ghosts are under his control. Due to their influence the entire world gets engaged in its own activities. 80-81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)