श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  8.87.78 
न विद्यते व्यवस्थानं क्रुद्धयो: कृष्णयो: क्वचित्।
स्रष्टारौ जगतश्चैव सततं पुरुषर्षभौ॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
‘यदि श्रीकृष्ण और अर्जुन क्रोधित हों तो यह संसार टिक नहीं सकता; ये महापुरुष श्रीकृष्ण और अर्जुन ही निरन्तर संसार की रचना करते हैं॥ 78॥
 
‘This world cannot stand if Shri Krishna and Arjuna are angry; it is the great men Shri Krishna and Arjuna who continuously create the world.॥ 78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)