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mahabharat 8.87.76: पाण्डवों ने वनवास आदि में सदैव बहुत दुःख भोगा है। पुरुषप्रवर अर्जुन तपस्वी और बहुत शक्तिशाली हैं ॥76॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  8.87.76 
क्लिश्यन्ते पाण्डवा नित्यं वनवासादिभिर्भृशम्।
सम्पन्नस्तपसा चैव पर्याप्त: पुरुषर्षभ:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों ने वनवास आदि में सदैव बहुत दुःख भोगा है। पुरुषप्रवर अर्जुन तपस्वी और बहुत शक्तिशाली हैं ॥76॥
 
Pandavas have always been suffering a lot through exile etc. Purushapravara Arjuna is endowed with penance and powerful enough. 76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)