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mahabharat 8.87.75: कुन्तीपुत्र अर्जुन सम्पूर्ण गुणों से युक्त और अपार बलवान है, तथा सम्पूर्ण धनुर्वेद का ज्ञाता है; अतः वह अवश्य ही विजयी होगा; क्योंकि यह देवताओं का कार्य है॥ 75॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  8.87.75 
बिभर्ति च महातेजा धनुर्वेदमशेषत:।
पार्थ: सर्वगुणोपेतो देवकार्यमिदं यत:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र अर्जुन सम्पूर्ण गुणों से युक्त और अपार बलवान है, तथा सम्पूर्ण धनुर्वेद का ज्ञाता है; अतः वह अवश्य ही विजयी होगा; क्योंकि यह देवताओं का कार्य है॥ 75॥
 
‘Kunti's son Arjuna, endowed with all the virtues and having immense power, possesses the complete Dhanurveda; hence he will surely be victorious; because this is the work of the gods.॥ 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)