श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  8.87.73 
तोषितो भगवान् येन महात्मा वृषभध्वज:।
कथं वा तस्य न जयो जायते शतलोचन॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
शतलोचन! जिन्होंने महान आत्मा भगवान वृषभध्वज को संतुष्ट कर लिया है, वे विजयी कैसे नहीं हो सकते? ॥ 73॥
 
Shatalochan! How can those who have satisfied the great soul Lord Vrishabhadhwaj not be victorious? ॥ 73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)