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mahabharat 8.87.70-71: कर्ण राक्षस पक्ष का व्यक्ति है; अतः उसे अवश्य परास्त करना चाहिए - ऐसा करने से देवताओं का कार्य अवश्य सिद्ध होगा। हे देवराज! अपना कार्य ही सब से अधिक महत्वपूर्ण है। 70-71.   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 70-71
 
 
श्लोक  8.87.70-71 
कर्णश्च दानव: पक्ष अत: कार्य: पराजय:॥ ७०॥
एवं कृते भवेत् कार्यं देवानामेव निश्चितम्।
आत्मकार्यं च सर्वेषां गरीयस्त्रिदशेश्वर॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
कर्ण राक्षस पक्ष का व्यक्ति है; अतः उसे अवश्य परास्त करना चाहिए - ऐसा करने से देवताओं का कार्य अवश्य सिद्ध होगा। हे देवराज! अपना कार्य ही सब से अधिक महत्वपूर्ण है। 70-71.
 
Karna is a man of the demon side; therefore he must be defeated - by doing so the task of the gods will certainly be accomplished. O lord of gods! One's own task is more important for everyone. 70-71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)