श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 67-68h
 
 
श्लोक  8.87.67-68h 
पूर्वं भगवता प्रोक्तं कृष्णयोर्विजयो ध्रुव:॥ ६७॥
तत् तथास्तु नमस्तेऽस्तु प्रसीद भगवन् मम।
 
 
अनुवाद
प्रभु! आपने पहले कहा था कि 'इन दोनों कृष्णों की विजय निश्चित है।' आपकी वह बात सत्य हो। आपको नमस्कार है। आप मुझ पर प्रसन्न हों। ॥67 1/2॥
 
Lord! You had said earlier that 'the victory of these two Krishnas is certain.' May that statement of yours be true. Salutations to you. Please be pleased with me.' ॥ 67 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)