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mahabharat 8.87.66-67h: देवताओं की यह बात सुनकर सबसे बुद्धिमान इन्द्र ने देवताओं के स्वामी भगवान ब्रह्मा को प्रणाम किया और यह अनुरोध किया।   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  8.87.66-67h 
तदुपश्रुत्य मघवा प्रणिपत्य पितामहम्॥ ६६॥
व्यज्ञापयत देवेशमिदं मतिमतां वर:।
 
 
अनुवाद
देवताओं की यह बात सुनकर सबसे बुद्धिमान इन्द्र ने देवताओं के स्वामी भगवान ब्रह्मा को प्रणाम किया और यह अनुरोध किया।
 
On hearing these words of the Gods, Indra, the wisest of all, bowed to Lord Brahma, the lord of all gods, and made this request.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)