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mahabharat 8.87.65-66h: ‘प्रभु! कर्ण और अर्जुन के विवाद से सारा जगत संशय में है। स्वयंभू! कृपया हमें उनकी विजय का सत्य बतलाएँ। कृपया ऐसे वचन कहें जिनसे दोनों की समान विजय का बोध हो।’ ॥65 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  8.87.65-66h 
कर्णार्जुनविवादेन सर्वं संशयितं जगत्।
स्वयम्भो ब्रूहि नस्तथ्यमेतयोर्विजयं प्रभो॥ ६५॥
स्वयम्भो ब्रूहि तद्वाक्यं समोऽस्तु विजयोऽनयो:।
 
 
अनुवाद
‘प्रभु! कर्ण और अर्जुन के विवाद से सारा जगत संशय में है। स्वयंभू! कृपया हमें उनकी विजय का सत्य बतलाएँ। कृपया ऐसे वचन कहें जिनसे दोनों की समान विजय का बोध हो।’ ॥65 1/2॥
 
‘Prabhu! The entire world is in doubt due to the dispute between Karna and Arjun. Svayambhu! Please tell us the truth regarding their victory. Please say such words which indicate the equal victory of both of them.' ॥ 65 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)