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mahabharat 8.87.56-57h: ब्रह्मऋषियों और प्रजापतियों के साथ ब्रह्मा और महादेवजी भी दिव्य विमान पर बैठकर उस क्षेत्र में आये।   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  8.87.56-57h 
ब्रह्मा ब्रह्मर्षिभि: सार्धं प्रजापतिभिरेव च॥ ५६॥
भवश्चैव स्थितो याने दिव्ये तं देशमागमत्।
 
 
अनुवाद
ब्रह्मऋषियों और प्रजापतियों के साथ ब्रह्मा और महादेवजी भी दिव्य विमान पर बैठकर उस क्षेत्र में आये।
 
Along with the Brahmarishis and Prajapatis, Brahma and Mahadevji also came to that region seated on the divine plane.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)