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mahabharat 8.87.53-54h: दिव्य ज्ञानी पुरुष हिरणों, पक्षियों के झुंड, हाथियों, घोड़ों, रथों और पैदल सैनिकों के साथ वायु और बादलों को वाहन बनाकर कर्ण और अर्जुन का युद्ध देखने के लिए वहाँ पहुँचे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  8.87.53-54h 
ईहामृगा: पक्षिगणा द्विपाश्वरथपत्तिभि:।
उह्यमानास्तथा मेघैर्वायुना च मनीषिण:॥ ५३॥
दिदृक्षव: समाजग्मु: कर्णार्जुनसमागमम्।
 
 
अनुवाद
दिव्य ज्ञानी पुरुष हिरणों, पक्षियों के झुंड, हाथियों, घोड़ों, रथों और पैदल सैनिकों के साथ वायु और बादलों को वाहन बनाकर कर्ण और अर्जुन का युद्ध देखने के लिए वहाँ पहुँचे थे।
 
The divine wise men along with the game deer, flocks of birds, elephants, horses, chariots and infantry, using the wind and the clouds as their vehicles, had arrived there to witness the battle between Karna and Arjuna. 53 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)