Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.87.5: माननीय महाराज! तीनों लोकों को जीतने के लिए प्रयत्नशील इन्द्र और बलि के समान उन दो वीरों को आमने-सामने देखकर सारी सेनाएँ आश्चर्यचकित हो गईं॥5॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.87.5 
तौ दृष्ट्वा विस्मयं जग्मु: सर्वसैन्यानि मारिष।
त्रैलोक्यविजये यत्ताविन्द्रवैरोचनाविव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
माननीय महाराज! तीनों लोकों को जीतने के लिए प्रयत्नशील इन्द्र और बलि के समान उन दो वीरों को आमने-सामने देखकर सारी सेनाएँ आश्चर्यचकित हो गईं॥5॥
 
Honorable Sir! All the armies were astonished to see those two heroes, like Indra and Bali, face to face, who were striving to conquer the three worlds. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)