Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.87.46-48: वसु, मरुद्गण, साध्य, रुद्र, विश्वेदेव, अश्विनी कुमार, अग्नि, इंद्र, सोम, पवन और दसों दिशाएं अर्जुन के पक्ष में हो गईं और आदित्य (इंद्र के अलावा) कर्ण के पक्ष में हो गए। महाराज! उस समय वैश्य, शूद्र, सूत और संकर जाति के लोग राधा-पुत्र कर्ण को हर प्रकार से अपनाने लगे। 46-48॥ | mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वसवो मरुत: साध्या रुद्रा विश्वेऽश्विनौ तथा॥ ४६॥
अग्निरिन्द्रश्च सोमश्च पवनोऽथ दिशो दश।
धनंजयस्य ते पक्षे आदित्या: कर्णतोऽभवन्॥ ४७॥
विश: शूद्राश्च सूताश्च ये च संकरजातय:।
सर्वशस्ते महाराज राधेयमभजंस्तदा॥ ४८॥
अनुवाद
वसु, मरुद्गण, साध्य, रुद्र, विश्वेदेव, अश्विनी कुमार, अग्नि, इंद्र, सोम, पवन और दसों दिशाएं अर्जुन के पक्ष में हो गईं और आदित्य (इंद्र के अलावा) कर्ण के पक्ष में हो गए। महाराज! उस समय वैश्य, शूद्र, सूत और संकर जाति के लोग राधा-पुत्र कर्ण को हर प्रकार से अपनाने लगे। 46-48॥
Vasu, Marudgan, Sadhya, Rudra, Vishvedev, Ashwini Kumar, Agni, Indra, Soma, Pawan and ten directions became in favor of Arjun and Adityas (other than Indra) became in favor of Karna. Maharaj! At that time people of Vaishya, Shudra, Suta and hybrid castes started adopting Radha's son Karna in all respects. 46-48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥