श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.87.4 
श्वेताश्वौ पुरुषौ दिव्यावास्थितावरिमर्दनौ।
शुशुभाते महात्मानौ चन्द्रादित्यौ यथा दिवि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उनके दोनों घोड़े श्वेत रंग के थे। दोनों ही दिव्य प्राणी थे और अपने शत्रुओं का संहार करने में समर्थ थे। वे दोनों महामनस्वी योद्धा युद्धभूमि में आकाश में चन्द्रमा और सूर्य के समान शोभायमान थे।
 
Both their horses were white in colour. Both were divine beings and capable of killing their enemies. Both those great-minded warriors looked beautiful on the battlefield like the moon and the sun in the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)