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mahabharat 8.87.39-40h: पर्वत, समुद्र, नदियाँ, वृक्ष और औषधियाँ - सभी ने अर्जुन की ओर आश्रय लिया था।   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  8.87.39-40h 
गिरय: सागराश्चैव नद्यश्च सजलास्तथा॥ ३९॥
वृक्षाश्चौषधयश्चैव व्याश्रयन्त किरीटिनम्।
 
 
अनुवाद
पर्वत, समुद्र, नदियाँ, वृक्ष और औषधियाँ - सभी ने अर्जुन की ओर आश्रय लिया था।
 
Mountains, oceans, rivers, trees and medicinal herbs - all of them had taken shelter on Arjun's side. 39 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)