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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.87.28 
ततो दृष्ट्वा महाराज राजमानौ महारथौ।
सिद्धचारणसंघानां विस्मय: समपद्यत॥ २८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उन दोनों महारथियों को उस स्थान पर सुशोभित देखकर सिद्धों और चारणों के समूह को बड़ा आश्चर्य हुआ।
 
Maharaj! Seeing the two great warriors adorning the place, the groups of Siddhas and Charanas were very surprised. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)