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mahabharat 8.87.27: हे राजन! दोनों के पास श्वेत घोड़े थे। दोनों उत्तम रथों पर सवार थे और उस महायुद्ध में उनके सारथी भी उत्तम पुरुष थे।   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  8.87.27 
उभौ श्वेतहयौ राजन् रथप्रवरवाहिनौ।
सारथी प्रवरौ चैव तयोरास्तां महारणे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! दोनों के पास श्वेत घोड़े थे। दोनों उत्तम रथों पर सवार थे और उस महायुद्ध में उनके सारथी भी उत्तम पुरुष थे।
 
‘O King! Both had white horses. Both were riding on excellent chariots and in that great war, their charioteers were excellent men.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)