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mahabharat 8.87.24: दोनों ही उत्तम शस्त्रों से सुसज्जित थे, दोनों ने युद्धकला सीखने के लिए कठोर परिश्रम किया था और दोनों ही अपने शस्त्रों की ध्वनि से आकाश को भर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.87.24 
उभौ वरायुधधरावुभौ रणकृतश्रमौ।
उभौ च बाहुशब्देन नादयन्तौ नभस्तलम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
दोनों ही उत्तम शस्त्रों से सुसज्जित थे, दोनों ने युद्धकला सीखने के लिए कठोर परिश्रम किया था और दोनों ही अपने शस्त्रों की ध्वनि से आकाश को भर रहे थे।
 
Both were armed with the finest weapons, both had worked hard to learn the art of war and both were filling the sky with the sound of their arms. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)