श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  8.87.2 
रथेन कर्णस्तेजस्वी जगामाभिमुखो रिपुम्।
युद्धायामर्षताम्राक्ष: समाहूय धनंजयम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली कर्ण क्रोध से लाल आँखें किए हुए अपने रथ पर सवार होकर अपने शत्रु धनंजय के सामने आया और उसे युद्ध के लिए ललकारा।
 
Then the illustrious Karna, his eyes turning red with anger, came in front of his enemy Dhananjaya on his chariot, challenging him to battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)