श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  8.87.116 
अद्याभिमन्युजननीं प्रहृष्ट: सान्त्वयिष्यसि।
कुन्तीं पितृष्वसारं च प्रहृष्ट: सञ्जनार्दन॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! आज आप बहुत प्रसन्न होंगे और अभिमन्यु की माता सुभद्रा तथा अपनी बुआ कुन्तीदेवी को सांत्वना देंगे।
 
Janardan! Today you will be very happy and will console Abhimanyu's mother Subhadra and your aunt Kuntidevi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)