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श्लोक  8.87.111 
अद्य राधेयभार्याणां वैधव्यं समुपस्थितम्।
ध्रुवं स्वप्नेष्वनिष्टानि ताभिर्दृष्टानि माधव॥ १११॥
 
 
अनुवाद
माधव! आज राधापुत्र कर्ण की पत्नियों के विधवा होने का अवसर है। निश्चय ही उन्होंने स्वप्न में अशुभ देखा होगा।
 
Madhava! Today is the occasion of the wives of Radha's son Karna becoming widows. Surely, they have seen inauspicious things in their dreams. 111.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)