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mahabharat 8.87.11: इसी प्रकार समस्त पाण्डव अर्जुन के हर्ष को बढ़ाने के लिए बाजे और शंखों की ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाओं को गुंजायमान करने लगे॥11॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  8.87.11 
तथैव पाण्डवा: सर्वे हर्षयन्तो धनंजयम्।
तूर्यशङ्खनिनादेन दिश: सर्वा व्यनादयन्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार समस्त पाण्डव अर्जुन के हर्ष को बढ़ाने के लिए बाजे और शंखों की ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाओं को गुंजायमान करने लगे॥11॥
 
In the same way all the Pandavas, to increase Arjuna's joy, began to resonate all directions with the sound of musical instruments and conches. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)