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mahabharat 8.87.107: भगवान् श्रीकृष्ण के ये वचन सुनकर कपिध्वज अर्जुन हँसे और बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले भगवान् श्रीकृष्ण से बोले -॥107॥   |   mahabharat अध्याय 8.87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  8.87.107 
इति कृष्णवच: श्रुत्वा प्रहसन् कपिकेतन:।
अर्जुन: प्रत्युवाचेदं कृष्णमक्लिष्टकारिणम्॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्रीकृष्ण के ये वचन सुनकर कपिध्वज अर्जुन हँसे और बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले भगवान् श्रीकृष्ण से बोले -॥107॥
 
Hearing these words of Lord Shri Krishna, Kapidhwaj Arjun laughed and said to Lord Shri Krishna, who did great deeds without any effort, -॥ 107॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)