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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 87: कर्ण और अर्जुनका द्वैरथयुद्धमें समागम, उनकी जय-पराजयके सम्बन्धमें सब प्राणियोंका संशय, ब्रह्मा और महादेवजीद्वारा अर्जुनकी विजय-घोषणा तथा कर्णकी शल्यसे और अर्जुनकी श्रीकृष्णसे वार्ता  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.87.1 
संजय उवाच
वृषसेनं हतं दृष्ट्वा शोकामर्षसमन्वित:।
पुत्रशोकोद्भवं वारि नेत्राभ्यां समवासृजत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे राजन, जब कर्ण ने वृषसेन को मारा हुआ देखा, तो वह दुःख और क्रोध से भर गया और अपने पुत्र के वियोग में उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
 
Sanjaya says: O King, when Karna saw Vrishasena killed, he was overcome with grief and anger and started shedding tears from his eyes for the loss of his son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)