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mahabharat 8.86.6-7h: वह ध्वज इंद्रधनुष की तरह चमक रहा है और आकाश में एक रेखा खींच रहा है। देखो, दुर्योधन का प्रिय कर्ण इधर आ रहा है। वह बाणों की वर्षा कर रहा है, मानो बादल जल की धारा बरसा रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 8.86: कर्णके साथ युद्ध करनेके विषयमें श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनका कर्णके सामने उपस्थित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.86.6-7h 
आखण्डलधनु:प्रख्यमुल्लिखन्तमिवाम्बरम्।
पश्य कर्णं समायान्तं धार्तराष्ट्रप्रियैषिणम्॥ ६॥
शरधारा विमुञ्चन्तं धारासारमिवाम्बुदम्।
 
 
अनुवाद
वह ध्वज इंद्रधनुष की तरह चमक रहा है और आकाश में एक रेखा खींच रहा है। देखो, दुर्योधन का प्रिय कर्ण इधर आ रहा है। वह बाणों की वर्षा कर रहा है, मानो बादल जल की धारा बरसा रहा हो।
 
That flag is shining like a rainbow and drawing a line in the sky. Look, Duryodhan's beloved Karna is coming this way. He is raining arrows like a cloud pouring down a torrent of water. 6 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)