श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 86: कर्णके साथ युद्ध करनेके विषयमें श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनका कर्णके सामने उपस्थित होना  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  8.86.4-5 
नानापताकाकलिलं किङ्किणीजालमालिनम्॥ ४॥
उह्यमानमिवाकाशे विमानं पाण्डुरैर्हयै:।
ध्वजं च पश्य कर्णस्य नागकक्षं महात्मन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इस पर नाना प्रकार की ध्वजाएँ लहरा रही हैं और यह छोटी-छोटी घंटियों की झालर से सुशोभित है। ये श्वेत घोड़े इस रथ को विमान के समान लिए हुए आकाश में उड़ते हुए प्रतीत होते हैं। महामनस्वी कर्ण के इस ध्वज को देखो, जिस पर हाथी की रस्सी का चिह्न अंकित है।॥4-5॥
 
‘Various flags are fluttering on it and it is decorated with a fringe of small bells. These white horses seem to be flying in the sky carrying this chariot like an aeroplane. Look at this flag of the great-minded Karna, on which the mark of an elephant's rope is imprinted. ॥ 4-5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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