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एवं ब्रुवंस्तदा पार्थ: कृष्णमक्लिष्टकारिणम्।
प्रत्युद्ययौ रथेनाशु गजं प्रतिगजो यथा॥ २१॥
अनुवाद
तब कुन्तीपुत्र अर्जुन सहज ही महान् कर्म करने वाले भगवान श्रीकृष्ण से ऐसा कहकर शीघ्रतापूर्वक अपने रथ पर सवार होकर कर्ण के सामने चले, मानो कोई प्रतिद्वंद्वी हाथी दूसरे हाथी का सामना करने जा रहा हो।
Saying this to Lord Krishna, who effortlessly performs great deeds, Arjuna, the son of Kunti, then quickly went in front of Karna in his chariot, as if a rival elephant was going to face another elephant.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥