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श्लोक  8.86.17 
अर्जुन उवाच
ध्रुव एव जय: कृष्ण मम नास्त्यत्र संशय:।
सर्वलोकगुरुर्यस्त्वं तुष्टोऽसि मधुसूदन॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - मधुसूदन श्री कृष्ण! मैं अवश्य विजयी होऊँगा, इसमें कोई संदेह नहीं है; क्योंकि आप समस्त जगत के गुरु हैं, मुझ पर प्रसन्न हैं।
 
Arjun said - Madhusudan Shri Krishna! I will certainly be victorious, there is no doubt about it; because you, the Guru of the entire world, are pleased with me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)