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mahabharat 8.86.13-16: जिनकी मूर्ति अत्यंत भयंकर एवं रौद्र है, जो महात्मा हैं, जिनके तीन नेत्र हैं और सिर पर जटाएँ हैं, उन सर्वशक्तिमान परमेश्वर भगवान शंकर को अन्य लोग देख भी नहीं सकते, फिर उनसे युद्ध करने का कोई अर्थ नहीं है। परंतु तुमने युद्ध के द्वारा समस्त प्राणियों का कल्याण करने वाले महादेव भगवान शिव के उन्हीं साकार रूप की आराधना की है, अन्य देवताओं ने भी तुम्हें वरदान दिए हैं; इसलिए महाबाहु पार्थ! तुम उन देवाधिदेव, त्रिशूलधारी भगवान शंकर की कृपा से कर्ण को उसी प्रकार मार डालो, जैसे प्रतिज्ञाओं का नाश करने वाले इन्द्र ने नमूचिका का वध किया था। कुन्तीनन्दन! तुम्हारा सदैव कल्याण हो। युद्ध में तुम्हारी विजय हो। 13-16॥   |   mahabharat अध्याय 8.86: कर्णके साथ युद्ध करनेके विषयमें श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनका कर्णके सामने उपस्थित होना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 86: कर्णके साथ युद्ध करनेके विषयमें श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनका कर्णके सामने उपस्थित होना  »  श्लोक 13-16
 
 
श्लोक  8.86.13-16 
भीममुग्रं महात्मानं त्र्यक्षं शर्वं कपर्दिनम्॥ १३॥
न शक्ता द्रष्टुमीशानं किं पुनर्योधितुं प्रभुम्।
त्वया साक्षान्महादेव: सर्वभूतशिव: शिव:॥ १४॥
युद्धेनाराधित: स्थाणुर्देवाश्च वरदास्तव।
तस्य पार्थ प्रसादेन देवदेवस्य शूलिन:॥ १५॥
जहि कर्णं महाबाहो नमुचिं वृत्रहा यथा।
श्रेयस्तेऽस्तु सदा पार्थ युद्धे जयमवाप्नुहि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जिनकी मूर्ति अत्यंत भयंकर एवं रौद्र है, जो महात्मा हैं, जिनके तीन नेत्र हैं और सिर पर जटाएँ हैं, उन सर्वशक्तिमान परमेश्वर भगवान शंकर को अन्य लोग देख भी नहीं सकते, फिर उनसे युद्ध करने का कोई अर्थ नहीं है। परंतु तुमने युद्ध के द्वारा समस्त प्राणियों का कल्याण करने वाले महादेव भगवान शिव के उन्हीं साकार रूप की आराधना की है, अन्य देवताओं ने भी तुम्हें वरदान दिए हैं; इसलिए महाबाहु पार्थ! तुम उन देवाधिदेव, त्रिशूलधारी भगवान शंकर की कृपा से कर्ण को उसी प्रकार मार डालो, जैसे प्रतिज्ञाओं का नाश करने वाले इन्द्र ने नमूचिका का वध किया था। कुन्तीनन्दन! तुम्हारा सदैव कल्याण हो। युद्ध में तुम्हारी विजय हो। 13-16॥
 
Whose idol is very fierce and fierce, who is a Mahatma, who has three eyes and hair on his head, other people cannot even see that almighty God Lord Shankar, then there is no point in fighting with him. But you have worshiped the same physical form of Mahadev, Lord Shiva, who provides welfare to all living beings, through war, other gods have also given you boons; That's why mighty-armed Partha! You, by the grace of that God of Gods, trident wielding Lord Shankar, kill Karna in the same way as Indra, the destroyer of vows, had killed Namuchika. Kuntinandan! May you always be well. May you win the war. 13-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)