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श्लोक 8.86.11-12h  |
सर्वयत्नेन कौन्तेय हन्तुमर्हसि सूतजम्॥ ११॥
न हि कर्णशरानन्य: सोढुमुत्सहते नर:। |
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| अनुवाद |
| कुन्तीनन्दन! आपको सारथीपुत्र कर्ण को मारने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए। कोई भी अन्य मनुष्य कर्ण के बाणों का सामना नहीं कर सकता। |
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| Kuntinandan! You should make every effort to kill the son of a charioteer, Karna. No other human being can withstand the arrows of Karna. |
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