श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 86: कर्णके साथ युद्ध करनेके विषयमें श्रीकृष्ण और अर्जुनकी बातचीत तथा अर्जुनका कर्णके सामने उपस्थित होना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  8.86.1-2 
संजय उवाच
तमायान्तमभिप्रेक्ष्य वेलोद्‍वृत्तमिवार्णवम्।
गर्जन्तं सुमहाकायं दुर्निवारं सुरैरपि॥ १॥
अर्जुनं प्राह दाशार्ह: प्रहस्य पुरुषर्षभ:।
अयं सरथ आयाति श्वेताश्व: शल्यसारथि:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! सीमा पार करके समुद्र के समान विशाल कर्ण गर्जना करता हुआ आगे आया। वह देवताओं के लिए भी अजेय था। उसे आते देख दशार्हवंशी और पुरुषों में श्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए अर्जुन से कहा - 'पार्थ! शल्य जिसका सारथी है और श्वेत घोड़ों से जुता हुआ रथ है, वही कर्ण अपने रथ सहित इस ओर आ रहा है।॥ 1-2॥
 
Sanjaya says - O King! Crossing the border, Karna, who was as huge as the ocean, came forward roaring. He was invincible even for the gods. Seeing him coming, Lord Krishna, the son of the Dasarha clan and the greatest of men, smilingly said to Arjuna - 'Partha! The one whose charioteer is Shalya and whose chariot is drawn by white horses, that same Karna is coming this way with his chariot.॥ 1-2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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