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mahabharat 8.85.7: सूर्य की किरणों के समान चमकने वाले और लोहे से बने हुए कुलिन्दराजकुमार के छोटे भाई ने गांधारराज के रथ को तोड़ डाला और बड़े जोर से गर्जना करने लगे। इतने में ही राजा गांधार ने उस गर्जना करने वाले योद्धा का सिर काट डाला॥7॥   |   mahabharat अध्याय 8.85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.85.7 
कुलिन्दपुत्रावरजस्तु तोमरै-
र्दिवाकरांशुप्रतिमैरयस्मयै:।
रथं च विक्षोभ्य ननाद नर्दत-
स्ततोऽस्य गान्धारपति: शिरोऽहरत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सूर्य की किरणों के समान चमकने वाले और लोहे से बने हुए कुलिन्दराजकुमार के छोटे भाई ने गांधारराज के रथ को तोड़ डाला और बड़े जोर से गर्जना करने लगे। इतने में ही राजा गांधार ने उस गर्जना करने वाले योद्धा का सिर काट डाला॥7॥
 
Kulindarajkumar's younger brother, shining like the sun's rays and made of iron, broke the chariot of Gandhara king and started roaring loudly. Meanwhile, King Gandhar cut off the head of that roaring warrior. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)