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श्लोक 8.85.39  |
तत: समक्षं स्वसुतं विलोक्य
कर्णो हतं श्वेतहयेन संख्ये।
संरम्भमागम्य परं महात्मा
कृष्णार्जुनौ सहसैवाभ्यधावत्॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| अपने पुत्र को श्वेतवर्णी अर्जुन के द्वारा युद्ध में अपनी आँखों के सामने मारा हुआ देखकर महामनस्वी कर्ण अत्यन्त क्रोधित हो उठा और उसने सहसा श्रीकृष्ण और अर्जुन पर आक्रमण कर दिया॥39॥ |
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| Seeing his son killed in battle by the white-carved Arjuna in front of his eyes, the great-minded Karna became very angry and suddenly attacked Shri Krishna and Arjuna. 39॥ |
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इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि वृषसेनवधे पञ्चाशीतितमोऽध्याय:॥ ८५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें वृषसेनका वधविषयक पचासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८५॥
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