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mahabharat 8.85.36-37h: किरीटधारी अर्जुन ने अट्टहास करते हुए निर्भयतापूर्वक उसके प्राणों पर दस बाणों से प्रहार किया और फिर चार तीखे छुरों से उसका धनुष, दोनों भुजाएँ और सिर काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 8.85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.85.36-37h 
विव्याध चैनं दशभि: पृषत्कै-
र्मर्मस्वशङ्कं प्रहसन् किरीटी॥ ३६॥
चिच्छेद चास्येष्वसनं भुजौ च
क्षुरैश्चतुर्भिर्निशितै: शिरश्च।
 
 
अनुवाद
किरीटधारी अर्जुन ने अट्टहास करते हुए निर्भयतापूर्वक उसके प्राणों पर दस बाणों से प्रहार किया और फिर चार तीखे छुरों से उसका धनुष, दोनों भुजाएँ और सिर काट डाला।
 
Laughing, the crown-wearing Arjun fearlessly attacked his vital spots with ten arrows. Then with four sharp knives he cut off his bow, both arms and head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)