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mahabharat 8.85.35-36h: राजन! ऐसा कहकर महात्मा अर्जुन ने अपना धनुष पोंछा और युद्ध में कर्णपुत्र वृषसेन को मारने के लिए उस पर लक्ष्य करके बाण चलाने लगे।   |   mahabharat अध्याय 8.85: कौरववीरोंद्वारा कुलिन्दराजके पुत्रों और हाथियोंका संहार तथा अर्जुनद्वारा वृषसेनका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  8.85.35-36h 
स एवमुक्त्वा विनिमृज्य चापं
लक्ष्यं हि कृत्वा वृषसेनमाजौ॥ ३५॥
ससर्ज बाणान् विशिखान् महात्मा
वधाय राजन् कर्णसुतस्य संख्ये।
 
 
अनुवाद
राजन! ऐसा कहकर महात्मा अर्जुन ने अपना धनुष पोंछा और युद्ध में कर्णपुत्र वृषसेन को मारने के लिए उस पर लक्ष्य करके बाण चलाने लगे।
 
Rajan! Saying this, Mahatma Arjuna wiped his bow and started shooting arrows aiming at him in the battle to kill Karna's son Vrishasena. 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)